हम जब घर में खाना खा रहे होते है तो हम घर में होटल जैसा स्वाद और सर्व करने का तरीका प्राप्त करने का प्रयास करते है और जब होटल में खाना खाना हो तो इसी होटल ढूंढते है जहा घर जैसा खाना और घर जैसी साफ़ सफाई रहती हो .............. दोनों ही परिस्थितियों का एक जगह पर सुमेल होना लगभग असंभव है ! क्योंकि घर में होटल जैसी ओपचारिकता नहीं हो सकती है और होटल में घर की गृहिणी के हाथो की मिठास खाने नहीं हो सकती है ! दोनों को मिलाने के अंतर्द्वंद में हम खाने का सही स्वाद न यहाँ ले पाते है न वहा ..........
हा एक बात जरूर है की यदि हम होटल में जहा खाना बन रहा होता है वह जगह जाकर देख कर खाना खाने बैठे और हमारे अन्दर जरा सी भी सम्वेंदन शीलता होगी तो होटल में खाना तुरंत छोड़ देंगे...........
हा एक बात जरूर है की यदि हम होटल में जहा खाना बन रहा होता है वह जगह जाकर देख कर खाना खाने बैठे और हमारे अन्दर जरा सी भी सम्वेंदन शीलता होगी तो होटल में खाना तुरंत छोड़ देंगे...........
