अपने जीवन के खट्टे मीठे अनुभवों को इन्टरनेट के इस जाल प् र सुरक्षित करने के मन से यहाँ ब्लोगिंग की शुरुआत कर रहा हु | वेसे में अपने काम के काम में एकदम panctual नहीं हूँ फिर भी यहाँ कौन देखने आ रहा है | जब टाइम मिलेगा लिखेंगे............... नहीं मिलेगा तो जय जिनेन्द्र |
जैन दर्शन में गहरी रूचि.......... आध्यात्मिक विचार मंथन जो मेरे जीवन का एक अभिन्न अंग बन गए है इन अनुभूतियों में स्पष्ट झलकेंगे ऐसा मेरा मानना है | क्योंकि जिस और हमारी रूचि होती है उसी और हमारा ध्यान जाता है चिंतन भी उसी और चलता रहता है |
पहले पारिवारिक धार्मिक पृष्ठभूमि होने से देवदर्शन पूजा भक्ति इत्यादि कार्य मेरे नित्य कर्म में शामिल रहे परन्तु आध्यात्मिक चर्चा वार्ता से हमारे परिवार का कोई विशेष सरोकार नहीं था केवल मेरे मामा पक्ष से कुछ जानकारिया सीख मुझे और मेरे परिवार को मिला करती थी | पहले मै और मेरा परिवार पूज्य गुरुदेव श्री के प्रबल विरोधियो में से एक थे परन्तु उस अज्ञान दशा पर अब उस सोंच पर पछतावा होता है | सही बात से अनभिज्ञ होने से और अफवाहों , गलत सलत तथ्यों पर विश्वास करने के कारण मै बहुत दिनों तक सही तत्त्व ज्ञान से दूर रहा |
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